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शनिवार, 13 दिसंबर 2025

अण्डकोष की सूजन

 अण्डकोष की सूजन


परिचय :  यह रोग ताकत से ज्यादा व्यायाम करने, अधिक उछलने, साइकिल चलाने, तेज दौड़ने, घुड़सवारी करने और अण्डकोषों पर किसी कारण चोट लग जाने पर सूजन उत्पन्न हो जाती है। अधिक तैरने तथा पानी में कमर तक खड़े होकर काम करने से भी अण्डकोषों में सूजन हो जाती है। अण्डकोष में पानी भर जाने की बीमारी को हाइड्रोसील कहा जाता है। अण्डकोष की श्लैष्मिक कला में रक्त का पानी एकत्र हो जाने से बीमारी होती है। कई बार शिशु के अण्डकोषों में पानी भर जाता है। अण्डकोष की प्रारंभिक अवस्था में पानी संचय नही होता, लेकिन अण्डकोष में सूजन होने से तेज दर्द होता है। आंत्रों में मल के शुष्क और कठोर होने पर दूषित वायु आवेग के कारण अण्डकोष में सूजन उत्पन्न हो जाती है। 


विभिन्न औषधियों से उपचार-


1. तिल : 25 ग्राम काले तिल में 25 ग्राम एरण्ड के बीजों की गिरी को एक साथ पीसकर अण्डाकोष पर एरण्ड के पत्तों के साथ बांधने से सूजन जल्दी मिट जाती है।


2. तंबाकू :


तंबाकू के पत्तों पर थोड़ा-सा तिल का तेल लगाकर हल्का सा गर्म करके अण्डाकोषों पर बांधने से अण्डकोषों के सूजन में काफी लाभ होता है। 

तंबाकू के पत्तों पर सरसों या तिल का तेल लगाकर हल्का-सा सेंककर अण्डकोषों पर बांधने से उनकी सूजन मिट जाती है। 


3. इन्द्रायण :


इन्द्रायण की जड़ और पुष्करमूल को तेल में पीसकर गाय के दूध के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में अण्डकोष का बढ़ना समाप्त हो जाता है। 

इन्द्रायण की जड़ को बरीक कूट-पीसकर, कपडे़ द्वारा छानकर एरण्ड के तेल में मिलाकर अण्डकोषों पर लेप करने से अण्डकोष सूजन की बीमारी मिट जाती है। 


4. बच : 10 ग्राम बच और 10 ग्राम सरसों को पानी के साथ पीसकर रोजाना अण्डकोष पर लेप करने से सूजन मिट जाती है।


5. करंज : करंज की मींगी को एंरड के तेल में घोटकर उसे तंबाकू के पत्ते पर लपेटकर अण्डकोषों पर लेप करने से अण्डकोष की सूजन समाप्त हो जाती है।


6. त्रिफला (हरड़, बहेड़ा आंवला) :


10-10 ग्राम त्रिफला, अरलू की जड़, एरण्ड की जड़, सभी को एक साथ लेकर कांजी में पीसकर लेप करने से सूजन और दर्द दूर हो जाते हैं। 

लगभग 1 चौथाई ग्राम त्रिफला के काढ़े को लगभग 1 चौथाई ग्राम गाय के मूत्र के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से अण्डकोष की सूजन कम हो जाती है। 


7. बैंगन : बैंगन की जड़ को पानी में मिलाकर अण्डकोषों पर कुछ दिनों तक लेप करने से अण्डकोषों की सूजन और वृद्धि में लाभ होता है।


8. पलाश : पलाश की छाल का चूर्ण बनाकर 5 ग्राम पानी के साथ सेवन करने से अण्डकोषों की वृद्धि में लाभ होता है।


9. गुड़मार : 2 ग्राम की मात्रा में गुड़मार के पत्तों का रस शहद में मिलाकर कुछ दिनों तक पीने से अण्डवृद्धि यानी अण्डकोष का बढ़ना समाप्त हो जाता है।


10. बिनौले : 10-10 बिनौले और सोंठ को लेकर कूट-पीसकर पानी के साथ लेप बनाकर हल्का-सा सेंकने अण्डकोषों पर बांधने से लाभ होता है।

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